प्राकृतिक खेती करने वाले किसान को सरकार की तरफ से मिलेगा रु 9000 प्रतिमाह?

प्राकृतिक खेती करने वाले किसान को सरकार की तरफ से मिलेगा रु 9000 प्रतिमाह ? Jansampark MP

प्राकृतिक खेती की महत्त्वपूर्ण योजना

आधुनिक जीवनशैली में हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित विकल्प है। सरकार ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शुरू की है जिसके अंतर्गत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को मासिक आय के रूप में 9000 रुपये प्रदान किए जाएंगे। यह एक प्रगतिशील पहल है जो किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगी।

प्राकृतिक खेती करने वाले किसान को सरकार की तरफ से मिलेगा रु 9000 प्रतिमाह ? Jansampark MP

प्राकृतिक खेती के लाभ

प्राकृतिक खेती करने के कई लाभ हैं। यह पर्यावरण के साथ मेल खाती है, प्रदूषण को कम करती है और मिट्टी को स्वस्थ रखती है। यह खेती में जीवाणुनाशकों का उपयोग कम करती है और प्राकृतिक रूप से पैदा होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को बढ़ाती है। प्राकृतिक खेती के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले और स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक खेती करने से किसानों को अधिक मुनाफा मिलता है और साथ ही स्थानीय किसानों का समर्थन भी होता है।

सरकार की पहल

मध्यप्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए यह नई योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को हर महीने 9000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगी और उन्हें प्राकृतिक खेती के प्रति अधिक प्रोत्साहन देगी। सरकार ने इस योजना के लिए विशेष बजट आवंटित किया है और इसका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

13 मई 2023, भोपाल: प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सरकार देगी 900 रुपये: श्री चौहान – मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यानी 12 मई को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में गौ रक्षा संकल्प सम्मेलन का उद्घाटन किया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ''1962 पर कॉल करने पर पशु चिकित्सा एम्बुलेंस बीमार जानवर तक पहुंच जाएगी. पशुपालक अपने घर पर ही पशु चिकित्सा का लाभ उठा सकेंगे। प्रत्येक ब्लॉक के लिए अलग-अलग एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।

श्री चौहान ने आगे कहा कि बीमार और घायल पशुओं के इलाज के लिए 406 एम्बुलेंस आवंटित की गई हैं। प्रत्येक एम्बुलेंस में एक पशु चिकित्सक, पैरापिट और सहायक सह चालक होंगे। इन एम्बुलेंस को राज्य स्तरीय कॉल सेंटर से जोड़ा जाएगा और जीपीएस के माध्यम से एम्बुलेंस की निगरानी की जाएगी।

हर साल एंबुलेंस पर 77 करोड़ रुपये खर्च होंगे
मोबाइल पशु चिकित्सा एम्बुलेंस केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना है। एंबुलेंस संचालन में हर साल करीब 77 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसमें केंद्र और राज्य सरकार क्रमश: 60 और 40 फीसदी खर्च करेंगी. एम्बुलेंस पशु उपचार, सर्जरी, कृत्रिम गर्भाधान, पैथोलॉजिकल परीक्षण आदि के लिए सभी प्रासंगिक उपकरणों से सुसज्जित होगी। कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर "1962" पर कॉल करके पशुपालक अपने यहां पशु चिकित्सा उपचार का लाभ उठा सकेंगे। घर।

आदिवासियों को मवेशी खरीदने पर सरकार सब्सिडी देगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गोवंश की हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. गौहत्या करने और अवैध परिवहन करने पर 7 साल की सजा का प्रावधान है. मवेशियों के अवैध परिवहन के मामले में दोष साबित होने पर कार्रवाई की जायेगी. प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को गाय पालने के लिए 900 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। इस महीने ऐसे 22,000 किसानों को योजना के तहत 900 रुपये की किस्त जारी की जाएगी. आदिवासी किसानों को गाय पालन के लिए गाय खरीदने पर 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस लेख के कुछ मुख्य बिंदु लिखें, क्या पूरा लेख नहीं लिखा?

नई योजना के लाभ

आर्थिक सहायता

प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को हर महीने 9000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। यह सहायता उनकी आर्थिक बुराइयों को कम करखने में मदद करेगी और उन्हें अधिक संबंधित कोशिशों के लिए प्रोत्साहित करेगी। यह सहायता किसानों के परिवारों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के साथ साथ उनकी आय को भी बढ़ाएगी।

प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन

सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों का उत्साह बढ़ाएगी। इससे किसानों को आगे बढ़ने के लिए संकल्पित करने का अवसर मिलेगा और वे प्राकृतिक खेती में अधिक निवेश करेंगे। इससे कृषि उत्पादन की वृद्धि होगी और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

स्थानीय किसानों का समर्थन

प्राकृतिक खेती के माध्यम से उत्पादित खाद्य पदार्थों को स्थानीय बाजार में प्रोत्साहित करने के लिए यह योजना महत्वपूर्ण है। किसानों को अधिक मुनाफा मिलेगा और स्थानीय खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ेगी। इससे स्थानीय किसानों का समर्थन होगा और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने का अवसर मिलेगा।

नई योजना के साथ एक कदम आगे

मध्यप्रदेश सरकार की नई योजना प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना पर्यावरण के साथ मेल खाती है और स्थानीय किसानों का समर्थन करती है। सरकार के इस पहल को स्वागत किया जाना चाहिए और हमें सभी उत्पादक किसानों को संबंधित योजना के बारे में जागरूक करना चाहिए।

प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए यहां कुछ महत्वपूर्ण टिप्स हैं:

  1. स्वच्छ खेती: प्राकृतिक खेती करने के लिए शुरुआत में अपने खेत को स्वच्छ रखने पर ध्यान दें। जल्दबाजी से इंधन, कीटनाशक और उर्वरकों का उपयोग न करें।

  2. उपयुक्त बीज सेलेक्शन: प्राकृतिक खेती में उपयुक्त बीज सेलेक्शन करना महत्वपूर्ण है। विभिन्न प्रकार के स्थानीय बीजों का उपयोग करें जो आपके क्षेत्र की माटी, जलवायु और पेड़-पौधों के अनुरूप हों।

  3. जैविक खाद उपयोग करें: केमिकल खादों की बजाय जैविक खाद का उपयोग करें। घर में उत्पादित कंपोस्ट का उपयोग कर सकते हैं और पशुओं के गोबर का भी उपयोग करें।

  4. प्राकृतिक कीट प्रबंधन: कीटनाशकों की बजाय प्राकृतिक कीट प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करें। उचित पेड़-पौधों को लगाने, प्राकृतिक रक्षा प्रणालियों को स्थापित करने और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग करने का प्रयास करें।

  5. जल संरक्षण: जल का संरक्षण करना खेती में बहुत महत्वपूर्ण है। बूंद-बूंद वृद्धि पदार्थों का उपयोग करें, सिंचाई की अच्छी प्रथा बनाएं और बरसाती पानी को संचित करने के लिए जल संग्रहण सुविधा का उपयोग करें।

  6. प्राकृतिक दुर्गंधकों का उपयोग: खेती में प्राकृतिक दुर्गंधकों का उपयोग करें, जैसे कि नीम का तेल और गर्म पानी का उपयोग। ये उपाय उच्च गुणवत्ता वाले फसलों के लिए कीट प्रबंधन में मददगार साबित हो सकते हैं।

  7. संबंधित पशुपालन: प्राकृतिक खेती में पशुपालन को शामिल करने का प्रयास करें। पशुओं के गोबर का उपयोग खेती में खाद के रूप में कर सकते हैं और उन्हें खेत में छोड़कर उनकी खाद का उपयोग कर सकते हैं।

  8. स्थानीय पदार्थों का उपयोग: स्थानीय पदार्थों का उपयोग करके खेती को औषधियों, खाद्य पदार्थों और उपयोगी पौधों के रूप में विस्तारित करें। इससे स्थानीय बाजार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय किसानों को भी आर्थिक लाभ होगा।

  9. अनुसंधान और शिक्षा: प्राकृतिक खेती में नवीनतम अनुसंधान को ध्यान में रखें और किसानों को नई तकनीकों और उनके लाभों के बारे में जागरूक करें। संबंधित कृषि विशेषज्ञों और सरकारी योजनाओं के साथ संपर्क बनाए रखें।

  10. समुदायिक सहयोग: अपने पड़ोसी किसानों और समुदाय के साथ सहयोग और ज्ञान साझा करें। ज्यादा से ज्यादा अनुभव और संगठन के साथ काम करें ताकि सभी किसान एक-दूसरे से सीख सकें और एक दूसरे की सहायता कर सकें।

  11. फसलों का संग्रहण और संरक्षण: उचित समय पर फसलों को काटें और उन्हें संरक्षित रखें। यह सुनिश्चित करें कि फसलों की अच्छी रक्षा हो और अधिकतम संभावित मुनाफा हासिल करें।

  12. सूखे की व्यवस्था: सूखे के समय जल संचयन और सुरक्षा की व्यवस्था करें। बूंद-बूंद वृद्धि पदार्थों, नलकूपों और छतरी जल संचयन सुविधाओं का उपयोग करें।

  13. प्राकृतिक रोगनाशकों का उपयोग: फसलों में प्राकृतिक रोगनाशकों का उपयोग करें। नीम, नींबू और प्याज की छाल जैसे प्राकृतिक उपाय फसलों को संरक्षित रखने में मददगार हो सकते हैं।

  14. संगठनित बाजार: स्थानीय संगठनित बाजारों का समर्थन करें जहां आप अपने उत्पादों को सीधे बेच सकते हैं। इससे आपको बेची गई मुद्रा का अधिक लाभ मिलेगा और स्थानीयग्राहकों को भी उचित मूल्य मिलेगा।

  15. निवेश की योजना: प्राकृतिक खेती में उन्नति के लिए निवेश की योजना बनाएं। अद्यतन तकनीक, साधारित उपकरणों का उपयोग और खेती के लिए उचित प्रशिक्षण प्राप्त करें।

इन टिप्स को अपनाकर प्राकृतिक खेती करने वाले किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं और पृथ्वी के संतुलन को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती से जुड़े सभी लोगों को इन टिप्स के बारे में जागरूक करना चाहिए ताकि हम स्वस्थ और संतुलित भूमि की ओर बढ़ सकें।

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