Rajasthan News राजस्थान में चावल संकट ने कांग्रेस को AAP को आवंटित अध्यादेश पर खुश कर दिया
Rajasthan News - भारतीय खाद्य निगम (भाखण) ने वादा किया कि 1 जुलाई तक अपने लोगों को मुफ्त चावल प्रदान करेगा, लेकिन राजस्थान के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को भाखण ने इस वादे को चौंका दिया है। इस चावल संकट के बाद उन्होंने भाजपा पर वेंडेटा राजनीति करने का आरोप लगाया है। वहीं, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (एएपी) ने यह अवसर प्राप्त कर राजस्थान को चावल अनाज प्रदान करने की सहमति दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि एएपी चाहती है कि कांग्रेस दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी (संशोधन) अध्यादेश मुद्दे में उन्हें समर्थन दें।
सियासी विवाद
राजस्थान में चावल के मामले में राजनीति बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री दीपक कुमार शिवकुमार ने केंद्र सरकार को भ्रष्टाचार की राजनीति करने का आरोप लगाया है। इस तरह की स्थिति के बीच, शिवकुमार ने खाद्य अनाज की खरीद के बारे में एक बड़ा बयान दिया है, कहते हुए: "हमने पंजाब, छत्तीसगढ़ और अन्य पड़ोसी राज्यों से बात की है और हम उनसे अनाज खरीदने जा रहे हैं। मैं केंद्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह राजनीति न करें, यह तुम्हारा चावल नहीं है, यह किसानों का चावल है। हमें किसी के बिना मुफ्त चावल नहीं चाहिए, कर्नाटक सरकार इसे खरीद सकती है।"
महत्वपूर्ण बात यह है कि सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार को अपने चुनावी वादे "अन्न भग्य योजना" के पूरा करने में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार लोगों की मनोमयता में भ्रम उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है। "अन्न भग्य योजना" के तहत, खाद्य अनाज की मात्रा 10 किलो तक बढ़ा दी गई है। सिद्धारमैया ने यह भी कहा है कि भाखण ने उन्हें एक पत्र लिखकर लिखा है, जिसमें कहा गया है कि वे राज्य को चावल आपूर्ति करने के लिए सहमत हो गए हैं, लेकिन इससे पहले दिनांक 14 जून का एक और पत्र आया, जिसमें कहा गया था कि वह चावल और गेहूं आपूर्ति नहीं कर सकता।
भाखण को सवाल पूछते हुए, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यदि भाखण भय की राजनीति कर रहा है तो। इसके अलावा, उन्होंने सरकार को ग़रीब विरोधी बताया है। एएपी के राज्याध्यक्ष पृथ्वी रेड्डी ने कहा है कि भगवंत मान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और सिद्धारमैया को पंजाब से कर्नाटक को चावल आपूर्ति करने की सहमति दी है। "हम दृढ़ता से यकीन रखते हैं कि राजनीतिक अंतरों के बावजूद, सभी दलों को उन पहलों का समर्थन करना चाहिए जो हमारे देश के लोगों की सहायता करने के लिए होते हैं।" रेड्डी ने भाजपा सरकार का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वे कर्नाटक को अतिरिक्त चावल प्रदान करने से मना कर रहे हैं।
अधिकांश राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एएपी इस मौके का फायदा उठा रही है और कांग्रेस के पक्ष में समर्थन मांगने की कोशिश कर रही है। चावल के मुद्दे में राज्य सरकार की भूमिका को लेकर संकट उत्पन्न हो रहा है और इससे कांग्रेस की चुनावी भूमिका पर असर पड़ सकता है। इससे पहले राजस्थान में चावल की किलाय चर्चा में रही है, जब भाखण ने चावल की आपूर्ति में रोक लगाने के लिए अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाया था। यह अवसरवादी राजनीति चाहे भाखण की बातों में कुछ सच्चाई हो या न हो, लेकिन इससे उनकी राजनीतिक खामियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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चावल संकट के बाद से ही एएपी ने यह निर्णय लिया है कि वह राजस्थान को चावल और अनाज प्रदान करने के लिए सहमत है। इसके साथ ही, वे कांग्रेस को दबाव देने के लिए अपने राजनीतिक हित के लिए इस मौके का फायदा उठा रहे हैं। इस बात की राजनीति के माध्यम से वे चाहते हैं कि कांग्रेस द्वारा प्रबंधित राज्यों में जनता के बीच विश्वास कम हो और उनके समर्थन में एएपी की बढ़त हो।
इससे स्पष्ट होता है कि चावल की मामले में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद जारी है और इससे राजनीतिक आपसी सहमति पर असर पड़ सकता है। चावल के मुद्दे में सभी पक्षों को अपनी राजनीतिक खामियों को सुधारने की जरूरत है और किसानों के हितों को महत्व देते हुए उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
समाचार सूत्र - sundayguardianlive
